रामेश्वर सिंह राजपुरोहित कानोडिया
दरिंदों को हो सजा-ए-मौत कम नही हो सजा।
बाड़मेर।
जिस मंदिर से शिक्षा का महादान होना चाहिए, अगर वो जगह नर्क बन जाए तो देश समाज का क्या होगा? आज कल विद्यालय में होने वाली घटनाएं दिल दहला रही है। माता-पिता बड़े प्रेम से अपने बच्चों को विद्यालय भेजते है। पर भगवान के सामने मने गए गुरू अर्थात पश्चिम भाषा व व्यवहार में टीचर युग के ये टीचर बच्चों के साथ खिलवाड़ करते है। ऐसे में एसी में बैठे नेता, अधिकारी या कानून पर को फर्क नही पड़ता है। जनता को सुनी सड़कों की खामोशी तोड़नी होगी। नए कानून बनाने की मांग करनी होगी। इस प्रकार की घटनाक्रम को कठोरता से रोकना होगा। इसके लिए कठोर कानून की आवश्यकता है।
बाड़मेर जिला मुख्यालय से करीब चार किलोमीटर दूर जैसलमेर रॉड पर स्थित केंद्रीय विद्यालय जालीपा में कल दोपहर छह वर्षीय मासूम बालिका के साथ स्कूल के किसी व्यक्ति द्वारा दुराचार किया।आज इस आसय का मामला महिला थाना में दर्ज हुआ। मासूम के पिता ने कहा कि वह तीन दशकों से अर्ध सेनिके बल के साथ देश की रक्षा में जुटा हूँ।अब मेरी बेटी के साथ घिनोनी हरकत हुई।देश की रक्षा के साथ बेटी की रक्षा की जिमेदारी निभाउंगा।
सूत्रानुसार बालिका को विद्यालय का परिचित स्टाफ बहला फुसला के रूम में ले गया ।तथा स्कूल की टेबल पर उसके साथ दुष्कर्म किया। जब पुलिस को घटना की जानकारी छह बजे शाम को मिल गई थी तो मेडिकल कराने में देरी क्यों कि।साथ ही सूचना के साथ ही पुलिस को अपनी कार्यवाही आरम्भ कॉनी थी।जब निजी चिकित्सालय की दो महिला चिकित्सको ने साफ कहा कि दुष्कर्म हुआ हैं।फिर पुलिस टालमटोल क्यों कर रही।
यह मामला एक बालिका का नही हज़ारो अभिभावकों के विश्वास और पढ़ने वाली लाखो बेटियों से जुड़ा हैं।पुलिस विभाग इस मामले को अतिसंवेदनशील मान कर कार्यवाही करें।ताकि आम जन में पुलिस पर पुनः भरोसा हो।


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