रामेश्वरसिंह राजपुरोहित
बैंगलोर
पिछले कुछ दशकों से जिस प्रकार से लोगों ने राष्ट्रहित व राष्ट्रवादी राजनीति की तरफ कदम बढ़ाए। तो लोगों ने उसे सराहा इसका परिणाम आज BJP के रूप में हमारे सामने पार्टी हैं। जब से bjp अस्तित्व में आई तब से लोगों में राष्ट्रवाद का भाव कूट-कूटकर के भर गया। संघ के अथक प्रयासों से देश के विभिन्न भागों में अलगाववाद के स्थानों पर राष्ट्रवाद खिल गया। इसका परिणाम आज का कर्नाटक का चुनाव परिणाम भी है।
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में एक बहुत ही बड़ा ऐतिहासिक परिणाम आज देखने को मिल रहा है। वहां के लोग राष्ट्रवाद के समर्थन में अपना वोट दिया। जबकि विपक्षी दूसरी पार्टियां लगातार देश के लिए नुकसानदेह व्यक्ति, संस्था व संगठनों को समर्थन करती आ रही थी। जैसे वह टीपू सुल्तान लिंगायत जैसे बांटने वाली लोगों को समर्थन कर रही थी। लेकिन बीजेपी के आते ही वहां की नकारात्मक राजनीति हार गई और राष्ट्रवादी राजनीति जीत गई। आज के चुनाव परिणाम केवल मात्र चुनाव परिणाम नहीं है। यह उन लोगों का परिणाम माना जा सकता है जो कुछ पार्टियां देश में लोगों को धर्म, जाति, भाषा व स्थान के नाम से बांट रहे थे। वहीं दूसरी और भारतीय जनता पार्टी एक राष्ट्रवादी के रूप में काम कर रही हैं। राष्ट्र को एक सूत्र में बांधने के लिए राष्ट्रवादियों ने अपना बहुत कुछ बलिदान दिया। कई पीढ़ियों के अथक प्रयास परिणाम है। आज देश राष्ट्रवाद की विचारधारा में बंधा हुआ है। कर्नाटक चुनाव में बीजेपी को मिली भारी बहुमत से यह साबित हो रहा है देश अब किसी के बांटने की बेकार में नहीं आएगा। राष्ट्रवाद को ही स्थान दिया जाएगा। विकास की राजनीति ही सर्वोपरि राजनीति है।
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में एक बहुत ही बड़ा ऐतिहासिक परिणाम आज देखने को मिल रहा है। वहां के लोग राष्ट्रवाद के समर्थन में अपना वोट दिया। जबकि विपक्षी दूसरी पार्टियां लगातार देश के लिए नुकसानदेह व्यक्ति, संस्था व संगठनों को समर्थन करती आ रही थी। जैसे वह टीपू सुल्तान लिंगायत जैसे बांटने वाली लोगों को समर्थन कर रही थी। लेकिन बीजेपी के आते ही वहां की नकारात्मक राजनीति हार गई और राष्ट्रवादी राजनीति जीत गई। आज के चुनाव परिणाम केवल मात्र चुनाव परिणाम नहीं है। यह उन लोगों का परिणाम माना जा सकता है जो कुछ पार्टियां देश में लोगों को धर्म, जाति, भाषा व स्थान के नाम से बांट रहे थे। वहीं दूसरी और भारतीय जनता पार्टी एक राष्ट्रवादी के रूप में काम कर रही हैं। राष्ट्र को एक सूत्र में बांधने के लिए राष्ट्रवादियों ने अपना बहुत कुछ बलिदान दिया। कई पीढ़ियों के अथक प्रयास परिणाम है। आज देश राष्ट्रवाद की विचारधारा में बंधा हुआ है। कर्नाटक चुनाव में बीजेपी को मिली भारी बहुमत से यह साबित हो रहा है देश अब किसी के बांटने की बेकार में नहीं आएगा। राष्ट्रवाद को ही स्थान दिया जाएगा। विकास की राजनीति ही सर्वोपरि राजनीति है।



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