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बागड़ी कलम ने शब्दों से बना दी प्रेमिका की तस्वीर

जोधपुर
राज्य के चुरू जिले के साहवा कस्बे से ताल्लुक रखने वाले देव पारीक यानी बागड़ी कलम स्कूल के दिनों में अभिनय के कारण अपने कस्बे में चर्चित रहे। लेकिन मार्गदर्शन के अभाव में इनका अभिनय वहीं दबा रह गया। पर तालियों की आवाज इनके जेहन से निकलने का नाम ही नहीं ले रही थी। इन्होंने मंच पर अपनी उपस्थिति बनाए रखने के लिए कविताएं लिखनी शुरू की। पिछले चार साल से लेखन क्षेत्र में भाग्य आजमा रहे बागड़ी कलम की पहली कविता पीपल वाली गली 29 सितंबर को रिलीज की गई। बागड़ी कलम से मिली जानकारी के अनुसार इनके नए प्रोजेक्ट "बहुत बदल चुका हूं मैं" और "झूठे वादे" भी जल्द खही रिलीज होंगे।

29 सितंबर को युटूब के जरिए रिलीज की गई कविता पीपल वाली गली में कल्पना और विचारों के तालमेल को बागड़ी कलम ने बहुत ही खूबसूरत तरीके से क्रमबद्ध रूप में पिरोया जैसे कोई फिल्म का सीन चल रहा हो।
"कॉर्नर पर एक उम्रदराज पीपल उसके नीचे बेगम, बादशाह, गुलाम के शोरगुल में उलझे पांच-सात बुजुर्ग आदमी और मटमेली बालू रेत में बेपरवाह खेलते बच्चे.." शुरुआती पंक्तियों से दर्शकों के दृष्टिपटल पर उस गली की पृष्ठभूमि तैयार कर जैसे ही "वैसे तो कुछ खास नहीं था उस पीपल वाली गली में सिवाय मल्टीकलर का पटीयाला पहने उस लड़की के.." पंक्ति बोली तो सबको एहसास हो गया था कि कविता जरूर कोई इश्किया मोड़ लेगी।
"प्यारी कत्थई आंखों में बस हल्की सी काजल की लकीर मानो चांद पर आउट लाइन की हो, रंग बिल्कुल पिघले हुए सोने की तरह, बाल एकदम स्याह भंवरा, होंठ गाजरी कलर के और उसी रंग की नैलपॉलीश.." शब्दों के रंगों से मौहब्बती माहोल में काल्पनिक प्रेमिका की तस्वीर बनाने में पुरी तरह से कामयाब रहे।

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