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स्थिति, किसकी बनेगी सरकार - सबसे तेज समीक्षा

 


कोलकाता

पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं लेकिन सबसे अधिक चर्चा पश्चिम बंगाल चुनाव की है। पहले चरण की वोटिंग से पहले ऐसी खबर आई जिससे बीजेपी नेताओं की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। ओपिनियन पोल में अब तक पिछड़ रही बीजेपी अब टीएमसी के बराबर पहुंचती दिख रही है। ऐसा तब है जब पहले चरण की वोटिंग भी नहीं हुई है। बंगाल में आठ चरणों में चुनाव है और बीजेपी की सीटें ओपिनियन पोल में बढ़ती दिख रही हैं।

आठ चरणों में वोटिंग कराए जाने को लेकर पहले ही ममता बनर्जी और लेफ्ट की ओर से सवाल खड़े किए गए थे। चुनावी जानकार भी इस बात को मानते हैं कि चुनाव अधिक चरणों में होने पर राजनीतिक दलों को उसके हिसाब से अपनी रणनीति बनाने का मौका मिल जाता है। इसमें कई बार राजनीतिक दल अलग- अलग क्षेत्रों के हिसाब से भी रणनीति बनाते हैं। ओपिनियन पोल का जो ट्रेंड फिल हाल बीजेपी के पक्ष में हैं।

पिछले ओपिनियन पोल में बीजेपी-टीएमसी की थी टक्कर

पश्चिम बंगाल के लिए किया गया पिछला ओपिनियन पोल एबीपी न्यूज और सीएनएक्स का था, जोकि मंगलवार शाम को जारी हुआ था। इस ओपिनियन पोल में बताया गया था कि बंगाल में बीजेपी को 130 से 140 सीटें तक मिल सकती हैं। ओपिनियन पोल के अनुसार, टीएमसी को 136-146 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था। वहीं, कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन को राज्य में 14-18 सीटें दी गई थीं। उधर, अन्य को एक से तीन सीटें तक दी गईं। हालांकि, सी वोटर के साथ किए गए फाइनल ओपिनियन पोल में न्यूज चैनल ने टीएमसी को तीसरी बार सरकार में वापसी का अनुमान जताया है।

किसे कितने फीसदी वोट का अनुमान?

पिछले लोकसभा चुनाव में बंगाल में 18 सीटें जीतकर सभी को चौंका चुकी बीजेपी इस बार राज्य में बड़ी जीत दर्ज करने का दावा कर चुकी है। हालांकि, अब जब फाइनल ओपिनियन पोल में टीएमसी की तीसरी बार सरकार बनाने का अनुमान जताया जा रहा है, तो अब लोगों की नजरें वोट फीसदी पर टिक गई हैं। सी वोटर के इस सर्वे के अनुसार, टीएमसी वोट फीसदी में बाजी मार सकती है। टीएमसी को इस बार 42 फीसदी वोट मिल सकता है, जबकि बीजेपी 37 फीसदी मतों पर ठहर सकती है। कांग्रेस और लेफ्ट की बात करें तो 13 फीसदी वोट मिल सकते हैं, जबकि अन्य की झोली में 8 फीसदी वोट जाने का अनुमान है।

डर के कारण बनेगी ममता की सरकार

चूँकि लगभग सभी ओपिनियन पोल में तृणमूल कांग्रेस को बहुत ही कम सीटों से जीत हासिल होती दिख रही है, बीजेपी का अनुमान है कि एक बार मतदाताओं के बीच से ममता बनर्जी के खिलाफ वोट डालने का डर हट जाए तो पासा पलट भी सकता है और प्रदेश में बीजेपी की सरकार बन जायेगी. बीजेपी का मानना है कि अगर तृणमूल कांग्रेस की फिर से सरकार बनती है तो इसका सबसे बड़ा कारण मतदाताओं का डर होगा कि अगर उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ वोट डाला तो उन पर जुल्म का कहर टूट पड़ेगा. बीजेपी का मानना है कि अगर इस डर को वह तोड़ने में सफल रही तो फिर उसकी सरकार बननी तय है.

देखना दिलचस्प होगा कि पश्चिम बंगाल में भय के माहौल में या भय-मुक्त मतदान होगा, क्योंकि इसी से किस दल की सरकार बनेगी इसका फैसला होने वाला है, ना कि ममता बनर्जी की लोकप्रियता या अलोकप्रियता के कारण. पहले और आखिरी चरणों के चुनाव के बीच 32 दिनों के अंतराल में माहौल बदल भी सकता है और चुनाव में जनता पलटी भी मार सकती है. यह कहना तो कठिन है कि पश्चिम बंगाल में सरकार किसकी बनेगी, पर इतना तय है कि यहां का चुनाव और जगरों के चुनाव से अधिक रोचक होने वाला है और आखिरी फैसला भय-युक्त और भय-मुक्त मतदान पर निर्भर रहेगा।



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