दिल्ली।
वामपंथी विचारधारा और उपिनवेशवादी मानिसकता केलोग हमेशा अपने प्रचार/विज्ञापन केजिरए हिन्दुओं को क्यों अपमानित करते रहते हैं? जब आप चाय का विज्ञापन बनाएं तो दिखाएं हिन्दू इतने कट्टर हैं की अपने पड़ोसी के घर चाय पीने को तैयार नहीं क्योंकि वो मुस्लिम हैं। जब सर्फ का विज्ञापन बनाएं तो दिखाएं मुस्लिम कितने अच्छे हैं बिना रंगे पुते मस्जिद नहीं जा पा रहे हैं। और आपको ऐसा लगता है कि ऐसे विमर्श चलाकर आप समाज में सद्भावना ला रहे हैं। अभी हिंदुस्तान यूनिलीवर का विवाद थमा नहीं था कि सर्फ एक्सेल ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। त्योहारों पर विशेष विज्ञापन बनाने वाले सर्फ एक्सेल ने होली पर एक नया विज्ञापन लॉन्च किया है। जिसमें हिन्दुओ की पवित्र आस्थाओं को बड़ी चालाकी के साथ दूषित करने का प्रयास किया गया है।
अब जरा विज्ञापन की हिन्दूवरोधी मानिसकता को समझने का प्रयास कीजिए। विज्ञापन एक साथ कई निशाने साध रहा है।
पहला होली के पिवत्र रँगों को “दाग” कहने की चेष्टा की गई। वह भी अन्य मज़हब के लिए। बच्ची द्वारा होली के रंगों में सरोबार होना सर्फ एक्सेल को “दाग” नजर आते हैं। दूसरा नमाज की आवश्यकता/पवित्रता होली के त्यौहार से अधिक महत्वपूर्ण बतानेषका चतुराई पूर्वक कुत्सित प्रयास किया गया है। अगर आपके मन मे विज्ञापन देखकर एक बार भी गंगा-जमुनी तहजीब, भाईचारा, बच्चों की मासूिमयत का खयाल आता है तो आप बौद्धिक पाश मे जकड़ चुके है। जहाँ आपको ऐसे भ्रमजाल (गंगा जमुनी तहजीब) में उलझा देना जो है ही नही औऱ जो है उससे दूर ले जाना।
तीसरा लव जिहाद…
यहाँ जान बूझकर हिन्दू लड़की चुनी गई। हिन्दू लड़का भी चुना जा सकता था लेकिन बचपन से मदद, मानवता के नाम पर हिन्दू बच्चियों और माँ बाप के अंदर लव जिहाद के बीज बो देना। यही बौद्धिक आतंकवाद हैं। बच्चों केनाम पर अपना नैरेिटव सेट करना जिसमें खुद आप उनकी मदद करे। यहाँ एक औऱ बात ध्यान देने योग्य है। विज्ञापन के अंत में आवाज शबाना आजमी की है जिनका एनजीओ धर्मांतरण औऱ हिन्दू विरोधी गितिविधयों के लिए ही कुख्यात है। अब इसका आप आसानी सेमतलब समझ सकते हैं कि ये सब कितना जान बूझकर किया गया है।
सर्फ़ एक्सेल से एक सवाल पूछिए, क्या सर्फ एक्सेल मोहर्रम/बकरीद/ईद पर ऐसा विज्ञापन बना सकता है? जहाँ हिन्दू लड़का मुस्लिम लड़की को कुर्बानी के खून के छींटों से बचाते हुए अपने कपड़ों पर लेते हुए मन्दिर ले जाये। तब शबाना आजमी कहे अपनो की मदद के लिए “दाग लगे तो दाग अच्छे हैं।” इस विज्ञापन के वायरल होने के बाद फिलहाल आम जनता आक्रोशित है और वो इस प्रोडक्ट के बिहष्कार की मुहिम चला रही है। इस वक्त ट्विटर पर
#BoycottSurfExcel ट्रेंड कर रहा है।


1 टिप्पणियाँ
Boycott
जवाब देंहटाएं