डीआरजे राजकीय कन्या महाविद्यालय बालोतरा में हिन्दी दिवस का आयोजन डाॅ. गुलाबदास वैष्णव के मुख्य आतिथ्य प्रतिभा सोनी के विशिष्ट आतिथ्य एवं प्रो. भरत कुमार आर्य की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ।
विद्यार्थियांे को संबोधित करते हुए गुलाबदास वैष्णव ने कहा कि हिन्दी राजभाषा के साथ - साथ जनता के हृदय की भाषा भी है। स्वाधीनता आन्दोलन में इसकी महती भूमिका रही है। यह संपर्क भाषा के रूप में देश को जोड़ने का कार्य करता है।
प्रतिभा सोनी ने कहा कि मातृभाषा प्राथमिक शिक्षा का प्रमुख आधार है एवं उच्च शिक्षा मंे ज्ञान विज्ञान की भाषा के रूप में हिन्दी एक सक्षम भाषा है। प्रशासनिक सेवाओं में भी हिन्दी की भूमिका बढ़ रही है। हमारा यह दायित्व है कि हिन्दी को श्रेष्ठ भाषा बनाने में अपना अमूल्य योगदान दे।
भरत कुमार आर्य ने विस्तार से उन कारणों पर प्रकाश डाला जिनके कारण हिन्दी स्वाधीनता आन्दोलन में प्रमुख भाषा होने के बावजूद राष्ट्रभाषा बनने से पिछड़ गयी । अंग्रेजो ने भाषा के माध्यम से वैमनस्य का बीज बोया। स्वाधीनता के बाद यह राजनीति का शिकार हो गयी। उसे जो सम्मानित स्थान मिलना चाहिए था उससे वह वंचित हो गयी। भाषा संस्कृति की संवाहिका है एवं संस्कृति को बचाये रखने के लिए हिन्दी का प्रचार एवं प्रसार जरूरी है। हिन्दी में ही वही क्षमता है जो सभी भाषाओं में समन्वय स्थापित कर देश की एकता व अखंडता को बनाये रखने में सक्षम है।
इस अवसर पर छात्राओं ने हिन्दी पर अपने विचार प्रस्तुत किए। चुकी राजपुरोहित हिन्दी पर मनमोहक प्रस्तुति दी।



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